- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप
प्रस्तुतकर्ता
Karupath
को
- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप
शास्त्रीय विधान के अनुसार सोमवार सप्ताह का दूसरा दिन है। चंद्रमा ग्रह के आधार पर सोमवार का नाम पड़ता है। अर्थात् सोमवार का चंद्रमा से सीधा संबंध है और चंद्रमा का शिव से। शिव अपने मस्तक पर द्वितीया का चंद्रमा धारण करते हैं और सोमवार भी सप्ताह का द्वितीय दिन है। सोमवार की सीधा संबंध शिवजी से भी है। वह पूर्णिमा के चंद्रमा को धारण नहीं करते जबकि पूर्णिमा के चंद्रमा में विशेष प्रकाश होता है। वह द्वितीया का चंद्रमा इसलिए धारण करते हैं कि वह उत्तरोत्तर वृद्धि करता है और अपने प्रकाश को बढ़ाता चला जाता है और पूर्णिमा के चंद्रमा का क्रमश: क्षय होता है। इसलिए सोमवार ऐसा वार है जिस दिन व्रत-उपासना करने से शिव विशेष प्रसन्न होते हैं। इस दिन पंचाक्षरी मंत्र (ओम नम: शिवाय) व महामृत्युंजय मंत्र (ऊं त्रयम्बकम् यजामहे सुगन्धिपुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बंधनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्) का जाप, रूद्राभिषेक व अन्य पूजा-पाठ करने से शिव की विशेष कृपा होती है। इस दिन उपासना करने से शिव व शिवा दोनों प्रसन्न होते हैं। रात को शिव की पूजा या अन्य अनुष्ठान विशेष फलदायी माना जाता है।
key words: somvar vart, monday fasting
व्रत विधान
प्रात: उठकर शौचादि से निवृत्त होकर सूर्यदेव का दर्शन करें और संकल्प लें कि व्रत पूर्वक भगवान शिव के चरणों में मेरा पूरा दिन बीतेगा। पूजा-पाठ अपनी व्यवस्था व समय के अनुसार कर सकते हैं। केवल स्मरण मात्र से भी शिव प्रसन्न हो जाते हैं। सूर्योदय से सूर्यास्त तक जल को छोड़कर कुछ अन्य न ग्रहण करें। सूर्यास्त के बाद दूध, चाय या फलाहार लिया जा सकता है।
key words: somvar vart, monday fasting
टिप्पणियाँ

खोज अच्छी है !
जवाब देंहटाएं