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प्रस्तुतकर्ता
Karupath
को
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मंगलवार को शुरू होने वाले नवरात्र का समापन भी मंगलवार को ही है। दीपावली भी मंगलवार को पड़ रही है अर्थात देवी लक्ष्मी का आगमन भी मंगलवार को है। मतलब प्रतिपदा (नवरात्र का प्रथम दिन) से अमावस्या (दीपावली) तक यानी माह के शुरू से अंत तक पांच मंगलवार पड़ रहे हैं। मंगलवार से ही माह की शुरुआत हो रही है और समापन भी मंगलवार को। इस पर वरिष्ठ ज्योतिषियों ने कहा कि शारदीय नवरात्र इस बार कष्ट, महंगाई व असंतोष लेकर आ रहा है। छत्रभंग के योग बन रहे हैं। केन्द्र सरकार पर संकट के बादल छा सकते हैं।
ज्योतिषाचार्य पं. शरदचंद्र मिश्र, डॉ. जोखन पाण्डेय शास्त्री व अरविन्द सिंह ने कहा कि मंगल क्रूर ग्रह है और मंगलवार क्रूर दिन। मंगलवार को नवरात्र शुरू होने से देवी का वाहन अश्व होता है। मारकण्डेय पुराण कहता है- शशिसुरे गजारूढ़ा शनि भौम तुरंगमे। गुरु शुक्रे च तोलायां बुधे नौका: प्रकीर्तिता।। यही बात शाक्त प्रमोद में भी कही गई है। देवी यदि अश्व पर आती हैं तो शासकों की नीतियों से आम जनों को कष्ट, राज्य भय, महंगाई में सतत वृद्धि और प्रजाजनों में असंतोष पैदा होता है। मारकण्डेय पुराण में लिखा है- गजे च जलदा देवी छत्रभंगतुरंगमे नौकायां सर्वसिद्धिस्यात् तोलायाम भरणं ध्रुवाम्। अर्थात देवी यदि अश्व पर चढ़कर आती हैं तो छत्रभंग का योग होता है। यही नहीं प्रतिपदा से लेकर अमावस्या तक पांच मंगलवार पड़ रहे हैं। ये भी इसी बात का संकेत कर रहे हैं। मुहूर्त शास्त्र में लिखा है- यत्रमासे महीसुनो पंचवासरा। क्षोभेन पूरिता छत्रभंगस्तदा भवेत्। एक माह में पांच मंगलवार पड़ने यहां भी छत्रभंग का उल्लेख है। ज्योतिषियों का इशारा साफ तौर पर केन्द्र सरकार के संकटग्रस्त होने की ओर है। उन्होंने साफ कहा कि सरकार गिर सकती है। यही नहीं मुहूर्त शास्त्र में संपूर्ण शुभ कार्य के लिए मंगलवार व कुंभ लग्न के परित्याग की बात कही गई है। 23 अक्टूबर दिन मंगलवार नवमी तिथि को शुक्र अपनी नीच राशि कन्या में प्रवेश करेगा और शनि व सूर्य से दिर्द्वादश योग बनाएगा। इसकी वजह से महिलाओं के विरुद्ध अपराध में वृद्धि हो सकती है। मनोरंजन के क्षेत्र में अपेक्षित अच्छे परिणाम का अभाव रहेगा। नवरात्र के साथ आने वाली स्थितियों का प्रभाव अगले नवरात्र अर्थात छह माह तक रहेगा। इसका प्रभाव कम करने के लिए देवी की त्रुटिरहित पूजा और पहले की अपेक्षा शक्ति की उपासना में तीव्रता व त्वरा अधिक होनी चाहिए। हर विधि से देवी को प्रसन्न कर इन स्थितियों का प्रभाव कम किया जा सकता है।
keyword: navaratra
ज्योतिषाचार्य पं. शरदचंद्र मिश्र, डॉ. जोखन पाण्डेय शास्त्री व अरविन्द सिंह ने कहा कि मंगल क्रूर ग्रह है और मंगलवार क्रूर दिन। मंगलवार को नवरात्र शुरू होने से देवी का वाहन अश्व होता है। मारकण्डेय पुराण कहता है- शशिसुरे गजारूढ़ा शनि भौम तुरंगमे। गुरु शुक्रे च तोलायां बुधे नौका: प्रकीर्तिता।। यही बात शाक्त प्रमोद में भी कही गई है। देवी यदि अश्व पर आती हैं तो शासकों की नीतियों से आम जनों को कष्ट, राज्य भय, महंगाई में सतत वृद्धि और प्रजाजनों में असंतोष पैदा होता है। मारकण्डेय पुराण में लिखा है- गजे च जलदा देवी छत्रभंगतुरंगमे नौकायां सर्वसिद्धिस्यात् तोलायाम भरणं ध्रुवाम्। अर्थात देवी यदि अश्व पर चढ़कर आती हैं तो छत्रभंग का योग होता है। यही नहीं प्रतिपदा से लेकर अमावस्या तक पांच मंगलवार पड़ रहे हैं। ये भी इसी बात का संकेत कर रहे हैं। मुहूर्त शास्त्र में लिखा है- यत्रमासे महीसुनो पंचवासरा। क्षोभेन पूरिता छत्रभंगस्तदा भवेत्। एक माह में पांच मंगलवार पड़ने यहां भी छत्रभंग का उल्लेख है। ज्योतिषियों का इशारा साफ तौर पर केन्द्र सरकार के संकटग्रस्त होने की ओर है। उन्होंने साफ कहा कि सरकार गिर सकती है। यही नहीं मुहूर्त शास्त्र में संपूर्ण शुभ कार्य के लिए मंगलवार व कुंभ लग्न के परित्याग की बात कही गई है। 23 अक्टूबर दिन मंगलवार नवमी तिथि को शुक्र अपनी नीच राशि कन्या में प्रवेश करेगा और शनि व सूर्य से दिर्द्वादश योग बनाएगा। इसकी वजह से महिलाओं के विरुद्ध अपराध में वृद्धि हो सकती है। मनोरंजन के क्षेत्र में अपेक्षित अच्छे परिणाम का अभाव रहेगा। नवरात्र के साथ आने वाली स्थितियों का प्रभाव अगले नवरात्र अर्थात छह माह तक रहेगा। इसका प्रभाव कम करने के लिए देवी की त्रुटिरहित पूजा और पहले की अपेक्षा शक्ति की उपासना में तीव्रता व त्वरा अधिक होनी चाहिए। हर विधि से देवी को प्रसन्न कर इन स्थितियों का प्रभाव कम किया जा सकता है।
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