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प्रस्तुतकर्ता
Karupath
को
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उगते सूरज को सलाम तो पूरी दुनिया करती है। लेकिन भारत की परंपरा है यह कि यहां डूबते सूरज को भी सलाम किया जाता है। सूरज डूबता हो या उगता हो, सूरज, सूरज है, न सूरज डूबता है न सूरज उगता है, शायद भारतीय परंपरा यह जानती है और सुबह हो या शाम, ऊर्जा के देवता सूरज को सलाम करने से नहीं चूकती। छठ व्रत का प्रथम दिन अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने से ही शुरू होता है और दूसरे दिन प्रात:कालीन सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का समापन किया जाता है।
सूरज तो एक बहाना है, इस दृष्टव्य लक्ष्य के जरिए कहीं न कहीं पूरी भारतीय मनीषा उस अव्यक्त सत्ता और ऊर्जा के केन्द्र को प्रणाम करती है जो सूरज जैसे अन्य दृष्टिगोचर हो रहे उपादानों के जरिये अभिव्यक्त होता है। संभवत: इसीलिए उसे जानने और पूजने के लिए स्थिति, काल, परिप्रेक्ष्य और संदर्भ सभी द्वितीयक स्तंभ हो जाते हैं। प्राथमिक रूप में उसे ही सलाम किया जाता है और पूजा जाता है। इसी वजह से उगते या डूबते सूरज का प्रतीक कभी उसकी प्रार्थना और वंदना का संकेत और सचेतक भले हो लेकिन मूल आराध्य की धारणा सदैव एक ही रही है।
सूर्य ऊर्जा का देवता माना गया है। सीधे वह ऊर्जा प्रदान करता हुआ दीखता भी है। लेकिन उसे भी ऊर्जा जहां से मिलती है उस मूल स्रोत को प्रणाम करने का आधार है सूर्य को प्रणाम करना। डूबता सूर्य हो या उगता, यह पृथ्वी की गति व चाल से हमें भ्रम में डाल सकता है लेकिन सूर्य तो न कभी डूबता है और न उगता है, वह सिर्फ है और हर क्षण हमें ऊर्जा प्रदान कर रहा है। दिन में प्रत्यक्ष तो रात में चंद्रमा के माध्यम से। भारतीय मनीषा ऊर्जा के देवता का यह रहस्य जानती है, इसलिए यह एकमात्र ऐसा देश हैं जहां डूबते सूर्य को भी सलाम किया जाता है।
keyword: chhath vrat
सूरज तो एक बहाना है, इस दृष्टव्य लक्ष्य के जरिए कहीं न कहीं पूरी भारतीय मनीषा उस अव्यक्त सत्ता और ऊर्जा के केन्द्र को प्रणाम करती है जो सूरज जैसे अन्य दृष्टिगोचर हो रहे उपादानों के जरिये अभिव्यक्त होता है। संभवत: इसीलिए उसे जानने और पूजने के लिए स्थिति, काल, परिप्रेक्ष्य और संदर्भ सभी द्वितीयक स्तंभ हो जाते हैं। प्राथमिक रूप में उसे ही सलाम किया जाता है और पूजा जाता है। इसी वजह से उगते या डूबते सूरज का प्रतीक कभी उसकी प्रार्थना और वंदना का संकेत और सचेतक भले हो लेकिन मूल आराध्य की धारणा सदैव एक ही रही है।
सूर्य ऊर्जा का देवता माना गया है। सीधे वह ऊर्जा प्रदान करता हुआ दीखता भी है। लेकिन उसे भी ऊर्जा जहां से मिलती है उस मूल स्रोत को प्रणाम करने का आधार है सूर्य को प्रणाम करना। डूबता सूर्य हो या उगता, यह पृथ्वी की गति व चाल से हमें भ्रम में डाल सकता है लेकिन सूर्य तो न कभी डूबता है और न उगता है, वह सिर्फ है और हर क्षण हमें ऊर्जा प्रदान कर रहा है। दिन में प्रत्यक्ष तो रात में चंद्रमा के माध्यम से। भारतीय मनीषा ऊर्जा के देवता का यह रहस्य जानती है, इसलिए यह एकमात्र ऐसा देश हैं जहां डूबते सूर्य को भी सलाम किया जाता है।
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टिप्पणियाँ

bharat desh nirala hai aur nirali hain yahan kee paramparayen .nice presentation.
जवाब देंहटाएंthanks. have a nice nite
जवाब देंहटाएंbahut hi janakariporn prastuti...
जवाब देंहटाएंthanks to read my post
हटाएंbahut achchi batein likhi hain aapne dwivedi ji...
जवाब देंहटाएंthanks. have a nice nite
जवाब देंहटाएंNice !!
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