भाई-बहन के मध्य सद्भावना का प्रतीक है भैयादूज

शास्त्रों के अनुसार भैया दूज अथवा यम द्वितीया को मृत्यु के देवता यमराज का पूजन किया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों को घर पर आमंत्रित कर या सायंकाल उनके घर पर जाकर उन्हें तिलक करती हैं। यमुना तट पर भाई-बहन का समवेत भोजन परम कल्याणकारी माना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार इस दिन यमराज अपनी बहन यमुना से मिलने आते हैं। उन्हीं का अनुसरण करते हुए भारतीय बहनें भातृमिलन परंपरा का निर्वहन करती हैं।
ज्योतिषाचार्य पं. शरदचंद्र मिश्र के अनुसार इस दिन बहनों को मृत्यु के देवता यमराज का विधि पूर्वक पूजन करना चाहिए। इसके पश्चात यमभगिनी यमुनाजी, चित्रगुप्त और यमदूतों का भी पूजन करना चाहिए।
पौराणिक आधार: इस संबंध में पद्मपुराण में कथा मिलती है कि सूर्य की संज्ञा से दो संतानें थीं- पुत्र यमराज व पुत्री यमुना। संज्ञा सूर्य का तेज न सहन करने के कारण अपनी छाया मूर्ति का निर्माण कर उसे सूर्य को सौंप कर चली गई। छाया को यम व यमुना से किसी प्रकार का लगाव नहीं था। यमुना अपने भाई यमराज के यहां प्राय: जाती और उनके सुख-दु:ख की बात पूछती। यमुना अपने भाई को अपने घर आने के लिए कहती परन्तु दायित्व बोझ के कारण वह उसके घर नहीं जा पाते। एक बार कार्तिक शुक्ल द्वितीया को यमराज अपनी बहिन यमुना के घर अचानक पहुंचे। बहन यमुना ने अपने सहोदर भाई का बड़ा आदर- सत्कार किया। विविध व्यंजन बनाकर भोजन कराया और भालपर तिलक लगाया। यमराज अपनी बहन द्वारा किए गए सत्कार से बहुत प्रसन्न हुए और यमुना को विविध प्रकार की भेंट अर्पित किए। जब चलने लगे तो उन्होंने यमुना से कोई मनोवांछित वर मांगने का अनुरोध किया। यमुना ने उनके आग्रह को देखकर कहा- भैया यदि आप वर देना चाहते हैं तो यही वर दीजिए कि आज के दिन प्रतिवर्ष मेरे यहां आया करें और मेरा आतिथ्य स्वीकार करें। इस प्रकार जो भाई अपने बहन के घर जाकर उसका आतिथ्य स्वीकार करे तथा उसे भेंट दे, उसकी सब अभिलाषाएं पूर्ण हों तथा उसे मृत्य का भय न रहे। यमुना की प्रार्थना यमराज ने स्वीकार कर लिया। तभी से भाई-बहन का यह त्योहार मनाया जाने लगा। ऐसी मान्यता है कि जो लोग इस दिन बहनों को वस्त्र व दान से संतुष्ट करते हैं उन्हें एक वर्ष तक कलह व शत्रु का भय नहीं रहता है।
वस्तुत: इस त्योहार का मुख्य उद्देश्य भाई-बहन के बीच सौमनस्य और सद्भावना का पावन प्रवाह अनवरत प्रवाहित रखना, एक-दूसरे के प्रति निष्कपट प्रेम को प्रोत्साहित करना, समष्टि के रूप में स्वास्थ्य, रूप, भक्ति, उल्लास व आनंद को परिवर्धित करना है। इस दिन यम लोक के लिपिक भगवान श्रीविश्वकर्मा की पूजा व उपासना भी भक्ति भाव से की जाती है।

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टिप्पणियाँ

  1. दीपावली पर्व के अवसर पर आपको और आपके परिवारजनों को हार्दिक बधाई और शुभकामनायें...

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