अंधेरा धरा पे कहीं रह न जाए

दीपावली के आगमन का समाचार सुनकर अंधकार पूर्व संध्या पर ही मैदान छोड़कर भाग खड़ा हुआ। एक दीपक अंधकार का सीना चीर देता है। यहां तो नरक चतुर्दशी के दिन मां लक्ष्मी की ममता की छांव में करोड़ों दीपक एक साथ जल उठे। लगा अंधकार का समूल नाश हो गया हो। वह अपना अस्तित्व बचाने के लिए दीये के नीचे छिप रहा था। बच्चे भी जैसे उसके पीछे पड़े हों, खोज-खोज दिये के पास पटाखे फोड़ रहे थे। फुलझड़ियां जला रहे थे और अंधकार को वहां से भी भागना पड़ रहा था। आज गोपाल दास नीरज की यह पंक्ति चरितार्थ हो रही थी- जलाओ दिए पर रहे ध्यान इतना, अंधेरा धरा पर कहीं रह न जाए।
यह प्रकाश के अवतरण व अंधकार के पराजय का दिन था। दीयों के जरिए प्रकाश के पक्षकार देशवािसयों ने देश को रोशन कर दिया। हर दरवाजे पर दीयों की लपलपाती लौ अंधकार को निगल जाने को बेकरार दिख रही थी। लौ से निकलता प्रकाश अपने चारो तरफ उजाले चादर बिछाए जा रहा था। अंधकार से ऊब चुके लोग प्रकाश की शरण में थे, उत्सव और आनंद मना रहे थे। देश का हर कोना रोशन था। प्रकाश की किरणें चारो तरफ छिटकी थीं। मां लक्ष्मी के आगमन पर उनके स्वागत की तैयारी में यह दीप जलाए गए थे। यह तो छोटी दिवाली थी जब अंधकार को मुंह छिपाना पड़ा। बड़ी दिवाली कल (मंगलवार) को है, इस दिन अंधकार का क्या होगा, राम जानें।
देश का हर घर व घर का हर कोना दीयों की रोशनी से रोशन था। इतना ही नहीं घर के बाहर घूर (कूड़ा वाले स्थानों), नाली, कुंआ, तालाब यानी लोगों ने अपने आसपास उस हर जगह पर दीप जलाए जहां भी अंधकार छिप सकता था। अंधकार के लिए कोई जगह नहीं छोड़ी गई थी। मंगलवार मां लक्ष्मी आने वाली हैं। उनके सामने कहीं यह काला-कलूटा अंधकार अपनी मनहूस छवि लेकर आ न जाए, इसलिए हर घर विद्युत झालरों से सजाया गया है। घर के कोने-अतरे को प्रकाशित कर दिया गया है। बच्चों के हाथों में फुलझड़ी व पटाखे थे। वह मस्ती के आलम में थे। जब वे फुलझड़ी या अनार छोड़ते तो लगता अंधकार जल-भुन रहा है। जब वे राकेट दागते तो लगता कि अंधकार को ही निशाना बना रहे हैं कि कहीं धरती से भागकर वह आसमान में छिप तो नहीं गया है। यानी छोटी दिवाली के दिन बच्चे, बड़े, बूढ़े व महिलाएं सभी अंधकार को खदेड़ने के िलए संकल्पित दिख रहे थे। अंधकार भाग भी गया था। इस खुशी में घर-घर में पकवान बने। बेटियों ने घर को रंगोलियों से सजाया। बड़ों ने नगर-चौराहों को रोशन किया तो बच्चों ने पटाखे व फुलझड़ियां छोड़ी। अंधकार के पराजित होने पर चारो तरफ उत्सव व उल्ला का माहौल था। चांद की उपस्थिति में रात खिलखिला रही थी और शायद मां लक्ष्मी के आगमन के दिन यानी दीपावली पर भी यही तैयारी करने का संदेश दे रही थी।

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