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प्रस्तुतकर्ता
Karupath
को
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गुरु ग्रह के निर्बल, अशुभ भावेश अथवा अकारक होने पर राहु से युति चाण्डाल योग का निर्माण करती है। चाण्डाल के समान यह राहु कुफल कारक है। इसलिए इस योग को गुरु चाण्डाल योग कहा जाता है। गुरु चाण्डाल योग में विच्छेदात्मक पापग्रह राहु गुरु के नैसर्गिक कारकत्व और शुभ फलों को नष्ट कर देता है। यह योग होने पर व्यक्ति क्रूर, धूर्त, दरिद्र और कुचेष्टाओं वाला होता है। मादक द्रव्य का सेवन करने वाला, वातादि रोगों से ग्रसित होता है। गुरु चाण्डाल योग होने पर जातक में कोई न कोई शारीरिक, मानसिक विकृति या विकलांगता देखी जाती है। गुरु स्वर्ण, धन, शारीरिक पुष्टि, विद्या, ज्ञान, धर्म और आध्यात्मिक सुख का कारक ग्रह है। इस योग में इन सबका ह्रास अथवा नाश होता है। संतान सुख और दाम्पत्य सुख में भी यह योग बाधा देता है। इस योग का शुभाशुभ फल कई स्थितियों पर नर्भिर करता है। वृष, मिथुन, कन्या, तुला, मकर, कुंभ राशि के लग्नों में गुरु अशुभ भावेश होने से बहुत अशुभ फल देता है। वृश्चिक, धनु, कर्क और मीन लग्न की कुण्डलियों में बनने वाला गुरु चाण्डाल योग अधिक अशुभ फलदायी नहीं होता। धनु लग्न की कुण्डली में बनने वाला यह योग शुभ फल प्रदान करता है। मकर राशि गुरु की नीच राशि है और मकर राशि में गुरु के स्थित होने से उसमें शनि का प्रभाव आ जाता है। इसलिए मकर राशि में बनने वाला गुरु चाण्डाल योग सर्वाधिक अशुभ फल देता है। गुरु के षड्बल में बली होने पर गुरु चाण्डाल योग का अशुभ फल अल्प हो जाता है। एकादश भाव में बनने वाला गुरु चाण्डाल योग प्राय: शुभ फल देता है।
-शरदचंद्र मिश्र
keword: jyotish
फल का समयकिसी भी जातक की जन्मपत्रिका में निर्मित होने वाला गुरु चाण्डाल योग उसके लिए सर्वाधिक प्रभावी उस समय होता है जब गुरु या राहु की महादशा, अंतरदशा या प्रत्यंतरदशा चल रही होती है। यह प्रभाव दशाओं और गोचर से भी देखा जाता है। जब राहु अथवा गुरु की महादशा, अंतरदशा या प्रत्यंतरदशा हो और उसमें राहु और गुरु की दशाएं भी सम्मिलित रूप से आएं तो इसका फल दृष्टिगोचर होता है। यदि गोचर में गुरु और राहु नकारात्मक फल दे रहे हैं तो भी इस योग का अशुभ फल प्राप्त होता है। जब गोचर में गुरु राहु से युक्त होकर जातक के जन्मकालीन चंद्रमा से अशुभ भाव में गोचर कर रहा हो तो उस समय गुरु चाण्डाल योग का अत्यंत प्रतिकूल फल प्राप्त होता है। गुरु शिक्षा व व्यवसाय को भी नष्ट कर देता है।
-शरदचंद्र मिश्र
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टिप्पणियाँ

nice post.. keep writing
जवाब देंहटाएंAcharya ji Guru ketu ki yuti bhi guru chandaal yog bna sakti hai kya?
जवाब देंहटाएं11bhav me kse gurudev shubh fal denge ki jabki wo to shukradev ki tula rashi me he
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