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प्रस्तुतकर्ता
Karupath
को
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सेंट जोसफ महागिरजाघर के पल्ली पुरोहित फादर संतोष ने कहा कि क्रिसमय यानी प्रभु यीशु के अवतार के उपलक्ष्य में इसाई विश्वासीगण 1 दिसम्बर से 24 दिसम्बर तक का समय प्रभु के आगमन काल की पुण्य अवधि के रूप में मनाते हैं। जिसके तहत उपवास, प्रार्थना, पश्चाताप, परोपकार व आध्यात्मिक तैयारी करते हुए समस्त इसाई भाई-बहन पिता परमेश्वर को धन्यवाद देते हैं कि मुक्तिदाता प्रभु यीशु के रूप में उन्होंने भेजा। क्रिसमस के पूर्व आगमन काल में सबसे महत्वपूर्ण रीति-रिवाज है कैरल सिंगिंग यानी प्रभु यीशु के जन्म गीत। इसके बारे में बाइबिल में लिखा है कि प्रभु के जन्म के समय आसमान में तारों के साथ स्वर्ग दूतों ने शांति व मुक्ति का संदेश पृथ्वी के निवासियों को गाकर सुनाया। दूसरा रीति-रिवाज है प्रभु के जन्म के समय दिखाई दिए पवित्र तारा को विश्वासीगण अपने घर या दरवाजे पर लगाते हैं ।
keyword: kairol
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बेहतर लेखन !!
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