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प्रस्तुतकर्ता
Karupath
को
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ज्योतिष शास्त्र को वेदों का नेत्र कहा गया है। अर्थात वेद जो समाज के दर्पण हैं उनका नेत्र, समाज यानी मनुष्य का भूत, वर्तमान व भूविष्य, इसलिए ज्योतिष भूत, वर्तमान व भविष्य का दर्पण है। इसके जरिए बीती घटनाओं के बारे जानकारी तो हासिल की ही जा सकती है, वर्तमान कैसे सुधरे और भविष्य किस प्रकार चिंता मुक्त हो और प्रगति का मार्ग प्रशस्त हो, इसके बारे में भी ज्योतिष हमारा पथ-प्रदर्शन करता है। अतीत में हमारी ज्योतिष की परंपरा बहुत समृद्ध थी, लेकिन बीच में इसमें पीढ़ीगत परंपरा और उनकी कम जानकारी के चलते गलत व भ्रामक फलादेशों ने लोगों का ज्योतिष के प्रति विश्वास कम किया। लेकिन वर्तमान समय में इस विज्ञान के क्षेत्र में जो पढ़ी-लिखी नई पीढ़ी आई है, उसने न सिर्फ पुराने शास्त्रों का अध्ययन किया बल्कि नए शोधों के चलते बहुत से नई जानकारियों से ज्योतिष शास्त्र को समृद्ध भी किया है। इस पीढ़ी के आने के बाद पुरानी अपढ़ित व मुंहजबानी पीढ़ी अपने आप ज्योतिष के परिदृश्य से बाहर हो गई। आज पुन: सही फलादेश और ज्योषीय परिणामों की सत्यता ने लोगों का झुकाव पुन: ज्योतिष की तरफ कर दिया है। आज बड़े पैमाने पर शोध हो रहे हैं। ज्योतिष की अनेक पत्रिकाएं निकल रही हैं और उसकी अच्छी-खासी पाठक संख्या भी है। आज ज्योतिष ने अपनी एक नई पहचान बनाई है। ज्योतिष वह विज्ञान है जिसके द्वारा हमें वर्तमान व भविष्य की जानकारी मिलती है, मनुष्य के भविष्य का निर्धारण करने में ज्योतिष महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इससे शिक्षा के लिए तथा नौकरी के लिए कौन सा क्षेत्र चुनें, इसका भी पता सहज ही लगाकर सही निर्णय लिया जा सकता है। बच्ची के विवाह में बाधा आने पर किस समय विवाह के लिए प्रयास करें ताकि सफलता मिले और वह एक सुखद दामपत्य जीवन व्यतीत करे, यह ज्योतिष शास्त्र की मदद से पूर्व में ही तय किया जा सकता है।
अभय गुप्ता
keyword: jyotish
नोट- इस वेबसाइट की अधिकांश फोटो गुगल सर्च से ली गई है, यदि किसी फोटो पर किसी को आपत्ति है तो सूचित करें, वह फोटो हटा दी जाएगीा
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टिप्पणियाँ

शानदार लेखन,
जवाब देंहटाएंजारी रहिये,
बधाई !!