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प्रस्तुतकर्ता
Karupath
को
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जब धनु राशि की संक्रान्ति होती है तब खरमास शुरू हो जाता है और मकर की संक्रान्ति लगते ही समाप्त हो जाता है। मीन की संक्रान्ति होने पर पुन: द्वितीय बार खरमास लग जाता है और वह मेष संक्रान्ति (सतुआन) लगते ही खत्म हो जाता है। खरमास पूरे वर्ष में दो बार लगता है। इन दोनों मासों में विवाह आदि शुभ कार्य स्थगित रहते हैं। इस वर्ष 16 दिसम्बर को प्रात: 5 बजकर 7 मिनट पर धनु की संक्रान्ति (खरमास) प्रारंभ होगी जो 29 दिन रहने के बाद 14 जनवरी 2013 को दोपहर 12 बजकर 55 मिनट तक रहेगी। इसके बाद सूर्य मकर में प्रवेश कर जायेगा।
खरमास में मुण्डन, यज्ञोपवीत, वर-वरण, वधू प्रवेश, द्विरागमन, विवाह, कुआं, तालाब, बावड़ी, उद्यान के आरम्भ एवं व्रतारंभ , उद्यापन, षोडशमहादान, नवान्न, प्याऊ लगाना, शिशु संस्कार, देव प्रतिष्ठा, दीक्षाग्रहण, प्रथम बार तीर्थ यात्रा, सन्यास ग्रहण, कर्णवेध, सकाम यात्रा, समावर्तन, विद्यारम्भ, राज्याभिषेक तथा रत्नभूषणादि कर्म सहित समस्त मांगलिक कार्य निषिद्ध हैं।
28 दिसम्बर दिन शुक्रवार को बतीसी पूर्णिमा है। धर्मशास्त्रों के अनुसार पुत्र-पौत्रादि तथा सौभाग्य व समृद्धि के निमित्त इसका व्रत किया जाता है। व्रत के दिन सफेद तिल युक्त जल से स्नान किया जाता है और भगवान नारायण का पूजन किया जाता है। भगवान की मूर्ति को स्नान करा कर श्रृंगार किया जाता है। पूजन में चन्दन, पुष्प इत्यादि का प्रयोग करके चौकोर वेदी बना कर तिल,घृत और शर्करा से हवन किया जाता है। खरमास में मन्दिरों को सजा कर भक्ति भाव से पूजन करके दही और भात से भोग लगाया जाता है।
सुरूपा द्वादशी व्रत पौष मास के कृष्ण पक्ष में द्वादशी के दिन किया जाता है। जो इस वर्ष 8 जनवरी 2013 को पड़ेगा। सौन्दर्य, सुख, सन्तान और सौभाग्य प्राप्ति के लिए इसका अनुष्ठान किया जाता है। इसके एक दिन पूर्व जितेन्द्रिय और सदाचार से रहकर भगवान विष्णु की कथा सुनें। जब संक्रान्ति के 15 दिन पूर्ण हो जायं तो सरसो तेल में पकौड़ा बनाकर कौआ को अर्पित किया जाता है। जिससे शनिकृत और राहुकृत दोष समाप्त हो जाते हैं।
keyword: kharmas
खरमास में मुण्डन, यज्ञोपवीत, वर-वरण, वधू प्रवेश, द्विरागमन, विवाह, कुआं, तालाब, बावड़ी, उद्यान के आरम्भ एवं व्रतारंभ , उद्यापन, षोडशमहादान, नवान्न, प्याऊ लगाना, शिशु संस्कार, देव प्रतिष्ठा, दीक्षाग्रहण, प्रथम बार तीर्थ यात्रा, सन्यास ग्रहण, कर्णवेध, सकाम यात्रा, समावर्तन, विद्यारम्भ, राज्याभिषेक तथा रत्नभूषणादि कर्म सहित समस्त मांगलिक कार्य निषिद्ध हैं।
28 दिसम्बर दिन शुक्रवार को बतीसी पूर्णिमा है। धर्मशास्त्रों के अनुसार पुत्र-पौत्रादि तथा सौभाग्य व समृद्धि के निमित्त इसका व्रत किया जाता है। व्रत के दिन सफेद तिल युक्त जल से स्नान किया जाता है और भगवान नारायण का पूजन किया जाता है। भगवान की मूर्ति को स्नान करा कर श्रृंगार किया जाता है। पूजन में चन्दन, पुष्प इत्यादि का प्रयोग करके चौकोर वेदी बना कर तिल,घृत और शर्करा से हवन किया जाता है। खरमास में मन्दिरों को सजा कर भक्ति भाव से पूजन करके दही और भात से भोग लगाया जाता है।
सुरूपा द्वादशी व्रत पौष मास के कृष्ण पक्ष में द्वादशी के दिन किया जाता है। जो इस वर्ष 8 जनवरी 2013 को पड़ेगा। सौन्दर्य, सुख, सन्तान और सौभाग्य प्राप्ति के लिए इसका अनुष्ठान किया जाता है। इसके एक दिन पूर्व जितेन्द्रिय और सदाचार से रहकर भगवान विष्णु की कथा सुनें। जब संक्रान्ति के 15 दिन पूर्ण हो जायं तो सरसो तेल में पकौड़ा बनाकर कौआ को अर्पित किया जाता है। जिससे शनिकृत और राहुकृत दोष समाप्त हो जाते हैं।
ज्योतिषाचार्य पं. शरद चन्द्र मिश्र से संतोष गुप्ताष की बातचीत
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