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प्रस्तुतकर्ता
Karupath
को
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भक्त प्रहलाद भक्तों में शिरोमणि हैंा उन्हें मारने के लिए उनके पिता हिरण्यकश्यप द्वारा नाना प्रकार के उपाय किए गए लेकिन वह सिर्फ प्रभु के नाम के सहारे सारे उपायों पर भारी पड़ते रहेा उनके पिता नहीं चाहते थे कि वह विष्णु का नाम लेंा वह चाहते थे कि मेरे राज्य में जैसे प्रजा केवल मेरी जय-जयकार करती है
, वैसे प्रहलाद भी मेरी ही जय-जयकार करेा लेकिन प्रहलाद ने सिर्फ स्वयं प्रभु का नाम लेते थे बल्कि जनता व बच्चों को भी वही करने की सलाह देते हैंा इससे कुपित होकर हिरण्यकश्यप ने उन्हें मारने का नाना प्रकार का यत्न कियाा उन्हें पागल हाथी के सामने खड़ा किया तो हाथी ने उन्हें अपनी पीठ पर बैठा लियाा हर जगह से और हर उपायों के असफल होने पर हिरण्यकश्यप ने उन्हें अपनी बहन होलिका जिसे आग से न जलने का वरदान प्राप्त था, उसे आदेश दिया कि इसे गोद में लेकर आग लगा लोा होलिका ने वैसा ही किया लेकिन होलिका जल गई और भक्त प्रहलाद बच गएा इसी के उपलक्ष्य में होलिका हर वर्ष जलाई जाती हैा
keyword: holi
नोट- इस वेबसाइट की अधिकांश फोटो गुगल सर्च से ली गई है, यदि किसी फोटो पर किसी को आपत्ति है तो सूचित करें, वह फोटो हटा दी जाएगीा
, वैसे प्रहलाद भी मेरी ही जय-जयकार करेा लेकिन प्रहलाद ने सिर्फ स्वयं प्रभु का नाम लेते थे बल्कि जनता व बच्चों को भी वही करने की सलाह देते हैंा इससे कुपित होकर हिरण्यकश्यप ने उन्हें मारने का नाना प्रकार का यत्न कियाा उन्हें पागल हाथी के सामने खड़ा किया तो हाथी ने उन्हें अपनी पीठ पर बैठा लियाा हर जगह से और हर उपायों के असफल होने पर हिरण्यकश्यप ने उन्हें अपनी बहन होलिका जिसे आग से न जलने का वरदान प्राप्त था, उसे आदेश दिया कि इसे गोद में लेकर आग लगा लोा होलिका ने वैसा ही किया लेकिन होलिका जल गई और भक्त प्रहलाद बच गएा इसी के उपलक्ष्य में होलिका हर वर्ष जलाई जाती हैा
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