मनुष्य पर ग्रहों का प्रभाव

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मुख्यत: 9 ग्रह बताए गए हैं। इनके प्रभाव से मानव प्रभावित हो सुख-दु:ख का अनुभव करता है। एक ही ग्रह के प्रभाव से कोई सुखी तो कोई दु:खी होता है। नौ ग्रहों का प्रभाव मूल रूप से एक ही जैसा सब पर पड़ता है पर वे ही ग्रह अलग-अलग स्थानों में होकर अलग-अलग फल देते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मनुष्य ग्रहों के अधीन है अर्थात ग्रहों के प्रभाव से प्रभावित होकर जीवन जीता है। दुष्कर्म, सत्कर्म, पाप-पुण्य उससे ही संचालित होते हैं। ग्रह हमारे जीवन को इतना प्रभावित किए हैं कि कभी इच्छा मात्र से सबकुछ आसानी से हासिल हो जाता है और कभी बहुत प्रयत्न करने के बाद भी छोटी सी सफलता नहीं मिल पाती है। क्या नौ ग्रहों का प्रभाव इतना है? एक ही ग्रह लोगों को अलग-अलग कैसे प्रभावित कर सकता है? नौ ग्रहों का अस्तित्व है या नहीं, इसका प्रमाण क्या है? ये ग्रह हमें प्रभावित करते भी हैं या नहीं? यह प्रश्न समझ में नहीं आता कि सूर्य जब सबको बराबर धूप दे रहा है तो लोगों को अलग-अलग कैसे प्रभावित कर सकता है।
नौ ग्रहों के अस्तित्व की जहां तक बात है। सूर्य-चंद्र को तो सभी आसानी से देख लेते हैं। सात ग्रहों को समझना है। ये सात ग्रह भी ग्रह मंडल में मौजूद हैं। हम आकाश मंडल में बहुत कुछ देखते हैं। तारे भी देखते हैं। असंख्य तारे भी लगभग एक जैसे हैं। स्कूल में बच्चे जब एक ड्रेस में होते हैं और छुट्टी के समय बाहर निकलते हैं तो उसमें अपने बच्चे को पहचानना मुश्किल होता है। हमारे बच्चे हमें आसानी से पहचान लेते हैं और दौड़कर पास आ जाते हैं। दरअसल जब हम खड़े होते हैं तो हमारे जैसा दूसरा कोई भ्रम पैदा करने वाला नहीं होता है। इसलिए बच्चे हमें पहचान लेते हैं। चूंकि सभी बच्चे एक जैसे दिखते हैं इसलिए हमें पहचानने में कठिनाई होती है। इसी तरह सूर्य-चंद्र कु छ अलग विशेषता के कारण पहचान में आ जाते हैं, जैसे पूरे स्कूल में कोई बच्चा सात फुट का हो तो उसे आसानी से पहचाना जा सकता है। सूर्य-चंद्र आसानी से दिख जाते हैं। अन्य ग्रहों को भी आम जनमानस ग्रह मंडल में देखता तो है पर जान नहीं पाता, थोड़ा प्रयास करने पर उन्हें भी पहचाना जा सकता है। रही बात सूर्य सबको एक ही डिग्री में धूप देता है। सभी अपनी अपनी ऊर्जा एक जैसा फेंकता है तो अलग-अलग लोगों को अलग-अलग फल कैसे देता है। दरअसल सूर्य तो एक जैसा ही प्रभाव डालता है पर हमारे शरीर का निर्माण किस तरह का है, उसी के अनुसार ऊर्जा रिसीव हो पाती है। समुद्र से कोई एक लोटा, कोई एक लीटर, कोई 25 लीटर जल निकाल लेता है, समुद्र किसी को मना नहीं करता है, पर हमारे पास जो पात्र है हम उसके अनुसार ही जल ले पाते हैं। समुद्र में जल है पर हमारे पास पात्र नहीं है। दूसरी बात यह है कि एक समय में ही सूर्य एक जैसी ऊर्जा दे रहा होता है, दूसरे समय में वैसी ऊर्जा सूर्य नहीं दे सकता। अर्थात अलग-अलग तिथि-समयों में जन्म हमारा होता है। सूर्य व अन्य ग्रह व राशि के अनुसार हमारे शरीर का निर्माण होता है। उस समय जब हमारे शरीर का निर्माण हो रहा था और जो हमारी पात्रता बनी, बाद में सूर्य कैसी भी ऊर्जा दे हमारा शरीर अपनी पात्रता के अनुसार ही उसे ग्रहण करता है। एक अन्य उदाहरण समझ में आता है कि मिठाई सबको मीठी लगती है पर जिस व्यक्ति में बुखार हो उसे मिठाई का मूल स्वाद नहीं मिलता है। किसी को सुगर हो तो वही मिठाई जहर का काम करती है। हमें समझना चाहिए कि दोष मिठाई में नहीं है। एक ही मिठाई किसी को लाभ पहुंचा रही है और किसी को नुकसान। उसी प्रकार ग्रहों का प्रभाव भी हमारे ऊपर होता है।
डॉ. धनेश मणि त्रिपाठी
ज्योतिषाचार्य, तारामंडल रोड, गोरखपुर

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