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प्रस्तुतकर्ता
Karupath
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समस्त संसार के सूर्य उपासक भगवान सूर्य की उपासना किसी न किसी रूप में करते हैं। समस्त ज्ञान का आधार सूर्य ही है। भगवान सूर्य का एक नाम सविता भी है, सविता अर्थात उत्पन्न करने वाला। पुराणों के अनुसार ये अतिदि के पुत्र आदित्य हैं जो अज्ञान रूपी अंधकार का नाश करते हैं। भगवान सूर्य वैदिक देवता हैं। सौर मंडल में सूर्य ही ग्रहों के राजा एवं सर्वाधिक प्रकाशमान हैं। सूर्य की उपासना से ही समस्त ग्रहों के दोषों का शमन हो जाता है।
मारकण्डेय पुराण में सूर्य उत्पत्ति, इनकी दोनों पत्नियां संज्ञा व छाया तथा 6 संतानों का वर्णन है। वेदों में कहा गया है कि उदय और अस्त होते हुए सूर्य की आराधना करने वाला समस्त कल्याण को प्राप्त होता है।
आचार्य शरदचंद्र मिश्र
keyword: makar sankranti
नोट- इस वेबसाइट की अधिकांश फोटो गुगल सर्च से ली गई है, यदि किसी फोटो पर किसी को आपत्ति है तो सूचित करें, वह फोटो हटा दी जाएगीा
मारकण्डेय पुराण में सूर्य उत्पत्ति, इनकी दोनों पत्नियां संज्ञा व छाया तथा 6 संतानों का वर्णन है। वेदों में कहा गया है कि उदय और अस्त होते हुए सूर्य की आराधना करने वाला समस्त कल्याण को प्राप्त होता है।
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