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प्रस्तुतकर्ता
Karupath
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अखिल भारतीय विद्वत महासभा की ओर से बताया गया कि भारतीय नववर्ष तथा वासंतिक नवरात्र की शुरुआत 11 अप्रैल से होगी। इस वर्ष नवरात्र नौ दिन का होगा। इसके अलावा आगामी 25 अप्रैल को सूक्ष्म चन्द्रग्रहण भी लगेगा। जो भारत में आंशिक रूप से दिखाई देगा।
महासभा के कोषाध्यक्ष पं. देवेन्द्र प्रताप मिश्र ने कहा कि विश्व के सबसे प्राचीन काल की गणना भारतीय काल से होती है। राजा विक्रमादित्य के शासन काल से प्रारम्भ विक्रम संवत 2070 के अनुसार भारतीय नववर्ष आगामी 11 अप्रैल गुरु वार को शुरू होगा। यह दिन ब्रह्मा द्वारा सृष्टि के रचना का दिन है। जिसमें शक्ति की उपासना की जाती है। उन्होंने कहा कि स्वयं जगदम्बा अपने श्रीमुख से कहती हैं कि जो अष्टमी, चतुर्दशी और नवमी को एकाग्रचित्त होकर 1, 2, 9 तथा 10 वें अध्याय का पाठ करेंगे, उन्हें कोई पाप स्पर्श नहीं कर सकेगा। प्रत्येक नववर्ष के प्रारम्भ में अर्थात चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से लेकर नवमी तक दुर्गासप्तशती का पाठ करने के बाद हवन किया जाता है। जिसमें शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चन्द्रघण्टा, कूष्मांडा, स्कन्दमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी तथा सिद्धिदात्री के स्वरूपों की पूजा की जाती है। वासंतिक नवरात्र में तंत्र विद्या की भी पूजा की जाती है। जिसको तांत्रिक अपने-अपने तरीके से भव्य रुप से करते हैं। उन्होंने बताया कि 25 अप्रैल को भारतीय समय के अनुसार चन्द्रग्रण लग रहा है जो रात्रि 1 बजकर 22 मिनट से प्रारम्भ होकर रात्रि 1 बजकर 53 मिनट तक रहेगा। चन्द्रहण के नौ घण्टे पहले से कुछ ग्रहण नहीं करना चाहिए।
keyword: navaratra
नोट- इस वेबसाइट की अधिकांश फोटो गुगल सर्च से ली गई है, यदि किसी फोटो पर किसी को आपत्ति है तो सूचित करें, वह फोटो हटा दी जाएगीा
महासभा के कोषाध्यक्ष पं. देवेन्द्र प्रताप मिश्र ने कहा कि विश्व के सबसे प्राचीन काल की गणना भारतीय काल से होती है। राजा विक्रमादित्य के शासन काल से प्रारम्भ विक्रम संवत 2070 के अनुसार भारतीय नववर्ष आगामी 11 अप्रैल गुरु वार को शुरू होगा। यह दिन ब्रह्मा द्वारा सृष्टि के रचना का दिन है। जिसमें शक्ति की उपासना की जाती है। उन्होंने कहा कि स्वयं जगदम्बा अपने श्रीमुख से कहती हैं कि जो अष्टमी, चतुर्दशी और नवमी को एकाग्रचित्त होकर 1, 2, 9 तथा 10 वें अध्याय का पाठ करेंगे, उन्हें कोई पाप स्पर्श नहीं कर सकेगा। प्रत्येक नववर्ष के प्रारम्भ में अर्थात चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से लेकर नवमी तक दुर्गासप्तशती का पाठ करने के बाद हवन किया जाता है। जिसमें शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चन्द्रघण्टा, कूष्मांडा, स्कन्दमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी तथा सिद्धिदात्री के स्वरूपों की पूजा की जाती है। वासंतिक नवरात्र में तंत्र विद्या की भी पूजा की जाती है। जिसको तांत्रिक अपने-अपने तरीके से भव्य रुप से करते हैं। उन्होंने बताया कि 25 अप्रैल को भारतीय समय के अनुसार चन्द्रग्रण लग रहा है जो रात्रि 1 बजकर 22 मिनट से प्रारम्भ होकर रात्रि 1 बजकर 53 मिनट तक रहेगा। चन्द्रहण के नौ घण्टे पहले से कुछ ग्रहण नहीं करना चाहिए।
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