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प्रस्तुतकर्ता
Karupath
को
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शिक्षक अपने शिष्यों के न केवल सूचना और ज्ञान का स्रोत होता है वरन वह उनके लिए मार्गदर्शक, सलाहकार व कॅरियर निर्माता भी होता है। अध्यापन व्यवसाय जानने के लिए जो ग्रह ज्यादा उत्तरदायी है वह है गुरु ग्रह (वृहस्पति)। इसके अलावा चंद्रमा, बुध भी सहायक ग्रहों के रूप में इस व्यवसाय के प्रति लोगों को आकृष्ट करते हैं। राशिगत आधार पर देखा जाय तो जन्मकुण्डली में लग्न, पंचम, दशम या एकादश भाव में गुरु या बुध की राशियां हों तो उनके प्रभाव से जातक अध्यापन के प्रति रुचि रखता है। उसे जब भी अवसर मिलता है वह अध्यापक के रूप में कार्य करने लगता है। अध्यापन में कॅरियर बनाने के लिए जो भाव उत्तरदायी हैं उनमें लग्न, तृतीय, पंचम, दशम व एकादश प्रमुख हैं। जब इन भावों और भावेशों का संबंध गुरु ग्रह से होता है तो जातक अध्यापन अथवा शिक्षा व्यवसाय से जुड़ता है। षष्ठम भाव में स्थित गुरु ग्रह भी अध्यापन से जोड़ता है। दशमेश अथवा दशम भाव में स्थित ग्रह का नवांशेश यदि गुरु ग्रह है तो जातक अध्यापन पेशे को अपनाता है। कॅरियर निर्माण के समय यदि गुरु की दशा, अंतर्दशा या प्रत्यंजतर दशा चल रही हो तो जातक शिक्षक आदि प्रतियोगिता परीक्षाओं में सफल होता है और उसका कॅरियर अध्यापक के रूप में बन जाता है। जातक स्कूल का अध्यापक बनेगा या कालेज का प्रोफेसर यह जन्मपत्रिका में बनने वाले राजयोगों और ग्रह की उच्चादि राशिगत स्थिति पर निर्भर करता है। यदि जातक की जन्मपत्रिका में केन्द्रेश और त्रिकोणेश के मध्य युति या परस्पर दृष्टि का संबंध बन रहा है तो जातक कालेज का शिक्षक बनता है। व्यक्ति किस विषय का शिक्षक होगा, यह लग्न, तृतीय, पंचम, दशम व एकादश भाव में स्थित ग्रहों अथवा इन भावों के स्वामियों से संबंध बनाने वाले ग्रहों पर मुख्य रूप से निर्भर करता है। यदि सूर्य संबंध बना रहा है तो प्रशासनिक, राजनीतिक विषय, धातु विज्ञान, गणित, भौतिक शास्त्र, इंजीनियरिंग, कृषि विज्ञान का अध्यापक होगा। चंद्रमा से संबंध बनने पर साहित्य, गृह विज्ञान, रसायन विज्ञान, पशुपालन, डेयरी विज्ञान, सौन्दर्य शास्त्र, चिकित्सा विज्ञान, पर्यटन शास्त्र, नौकायन, जलशास्त्र, नर्सिंग, नक्शा बनाने के शास्त्र का अध्यापक होगा। मंगल से संबंध बनने पर भूगोल, खान, खनिज विज्ञान, धातु विज्ञान, रसायन विज्ञान, मैकेनिकल इंजीनियरिंग, पुलिस, सेना से संबंधित विषय, पेट्रोलियम, पर्वतारोहण, साहसपूर्ण कार्यों से संबंधित विषयों का अध्यापक होगा। बुध से संबंध बनने पर वाणिज्य एवं प्रबंधक संकाय से संबंधित विषय, अर्थशास्त्र, बैंकिंग, सांख्यिकी, गणित, ज्योतिष, पत्रकारिता, प्रकाशन से संबंधित विषय, पुस्तकालय, वेद, शिक्षा शास्त्र, व्याकरण का अध्यापक होगा। गुरु से संबंध बनने पर शिक्षा शास्त्र, ज्योतिष, धर्मशास्त्र, पौरोहित्य, वेद, स्मृति, विधि शास्त्र, दर्शन, तर्कशास्त्र, वेदान्त आदि अध्यापक होगा। शुक्र से संबंध बनने पर कला, नृत्य, संगीत, नाट्य शास्त्र, साहित्य, फिल्म, टेलीविजन उद्योग से संबंधित विषयों का अध्यापक होगा। शनि से संबंध बनने पर इतिहास, पुरातत्व, पुराण, दर्शन, स्मृति, विदेशी भाषाओं, एन्थ्रोपोलाजी व इंजीनियरिंग से संबंधित विषयों का अध्यापक होगा। राहु से संबंध बनने पर ज्योतिष, धर्मशास्त्र, तंत्र-मंत्र, जादू-टोना, परामनोविज्ञान, रहस्यमय एवं प्राचीन विषयों का अध्यापक होगा। केतु से संबंध बनने पर कला व चिकित्सा से संबंधित विषयों का अध्यापक होगा। कई बार कॅरियर निर्माण के समय शिक्षण व्यवसाय में जाने योग्य दशाओं के अभाव में जातक दूसरे व्यवसाय की ओर मुड़ जाता है परन्तु उसकी अभिरुचि सदैव शिक्षण की ओर रहती है और अवसर प्राप्त होने पर अध्यापन की ओर प्रवृत्त हो जाता है।
आचार्य शरदचंद्र मिश्र, 430 बी आजाद नगर, रूस्तमपुर, गोरखपुर
keyword: guru grah
नोट- इस वेबसाइट की अधिकांश फोटो गुगल सर्च से ली गई है, यदि किसी फोटो पर किसी को आपत्ति है तो सूचित करें, वह फोटो हटा दी जाएगीा
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टिप्पणियाँ

Very deep subject to discuss and learn I guess.
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