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प्रस्तुतकर्ता
Karupath
को
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यूरोप में सर्वप्रथम जन जागृति का उदय इटली में हुआ और वहां से वह यूरोप के अन्य देशों में फैला। धार्मिक बंधनों के विरुद्ध व्यक्ति, समाज और राष्ट्र में आंदोलन हुआ। व्यक्तिवाद व स्वातंत्र्य की लहर दौड़ पड़ी। प्राचीन ग्रीक विचारधारा का उदय हुआ। ग्रीक कला के प्रतीकों का ग्रीक साहित्य के ग्रंथों की पाण्डुलिपियों का प्रबल अन्वेषण होने लगा। लोग धार्मिक आदेशों की अपेक्षा ग्रीक कला कृतियों को और ग्रीक साहित्य को पुन: आदर देने लगे। प्लेटो, एरिस्टॉटल और ग्रीक दार्शनिकों की कृतियों का अध्ययन होने लगा। इनके ग्रंथों का ग्रीक भाषा से लैटिन भाषा में अनुवाद होने लगा। इसमें अनेक राजाओं, सामंतों और कुछ धर्मगुरुओं ने भी सहयोग दिया। इसी बीच तुर्कों का आक्रमण फुस्तुनतुनिया पर हुआ और इन्होंने अधिकार भी कर लिया। फलस्वरूप ग्रीक विद्वान भागकर शेष यूरोप में फैल गए। इसी बीच कोलम्बस (1492) में हिन्दुस्तान के धोखे में अमेरिका की खोज की। इसके कुछ समय बाद वास्को द गामा द्वारा यूरोप से हिन्दुस्तान आने के समुद्र पथ की खोज हुई। इसके कारण यूरोप के व्यापार और उपनिवेशवाद का प्रबल उत्थान हुआ।
पूर्वी देशों के विचार भी पश्चिम में जाने लगे। इटली में यह जागरण साहित्यिक, कलात्मक और सांस्कृतिक हुआ। कुछ समय पश्चात इटली में धर्म सुधार का आंदोलन चल पड़ा। सन 1517 ई. में मार्टिन लूथर (1483- 1546) के धर्म सुधार आंदोलन का श्रीगणेश हुआ और 1521 में यह काफी जोर पकड़ लिया। पोप के कैथोलिक संप्रदाय के विरुद्ध इसाई मत के ही प्रोटेस्टेंट संप्रदाय का उदय हुआ। फिर यह जर्मनी के बाहर अन्य यूरोपीय देशों में फैल गया। व्यक्तियों ने अपने आपको पोप के धार्मिक आदेशों के बंधनों से तथा कुछ देशों ने स्वयं को चर्च की प्रभुसत्ता से मुक्त कर लिया। धीरे-धीरे यह आंदोलन फैलता चला गया। चर्च ने इस धर्म आंदोलन को पूर्ण रूप से दबाने की चेष्टा की। विरोधियों को कारावास में डाला गया। अनेक यातनाएं दी गर्इं। कुछ स्वतंत्र विचारधारा के व्यक्तियों को जीवित जला दिया गया। फिर भी यह धर्म सुधार आंदोलन पनपता ही गया और अंत में इसने पोप की प्रभुसत्ता को समाप्त करके ही दम लिया। मध्य युग के पश्चात आधुनिक युग के प्रारंभिक दर्शन का समय रहा। इसमें कुशा निवासी निकोलस, गिओर्दानो ब्रूनो, टोमस कैम्पानेला, फ्रांसिस बेकन, टॉमस हाब्स के नाम प्रमुख हैं।
आचार्य शरदचंद्र मिश्र, 430 बी आजाद नगर, रूस्तमपुर, गोरखपुर
keyword: western philosophi
नोट- इस वेबसाइट की अधिकांश फोटो गुगल सर्च से ली गई है, यदि किसी फोटो पर किसी को आपत्ति है तो सूचित करें, वह फोटो हटा दी जाएगीा
पूर्वी देशों के विचार भी पश्चिम में जाने लगे। इटली में यह जागरण साहित्यिक, कलात्मक और सांस्कृतिक हुआ। कुछ समय पश्चात इटली में धर्म सुधार का आंदोलन चल पड़ा। सन 1517 ई. में मार्टिन लूथर (1483- 1546) के धर्म सुधार आंदोलन का श्रीगणेश हुआ और 1521 में यह काफी जोर पकड़ लिया। पोप के कैथोलिक संप्रदाय के विरुद्ध इसाई मत के ही प्रोटेस्टेंट संप्रदाय का उदय हुआ। फिर यह जर्मनी के बाहर अन्य यूरोपीय देशों में फैल गया। व्यक्तियों ने अपने आपको पोप के धार्मिक आदेशों के बंधनों से तथा कुछ देशों ने स्वयं को चर्च की प्रभुसत्ता से मुक्त कर लिया। धीरे-धीरे यह आंदोलन फैलता चला गया। चर्च ने इस धर्म आंदोलन को पूर्ण रूप से दबाने की चेष्टा की। विरोधियों को कारावास में डाला गया। अनेक यातनाएं दी गर्इं। कुछ स्वतंत्र विचारधारा के व्यक्तियों को जीवित जला दिया गया। फिर भी यह धर्म सुधार आंदोलन पनपता ही गया और अंत में इसने पोप की प्रभुसत्ता को समाप्त करके ही दम लिया। मध्य युग के पश्चात आधुनिक युग के प्रारंभिक दर्शन का समय रहा। इसमें कुशा निवासी निकोलस, गिओर्दानो ब्रूनो, टोमस कैम्पानेला, फ्रांसिस बेकन, टॉमस हाब्स के नाम प्रमुख हैं।
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टिप्पणियाँ

nice post...
जवाब देंहटाएंInkMyTravel
thanks vishal
हटाएंबढियां पोस्ट! गोरखपुर के ब्लॉगर को देखकर और भी प्रसन्नता हुयी. ऐसे ज्ञानवर्धक पोस्ट लिखते रहें.
जवाब देंहटाएं-अभिजित ( Reflections )
thanks abhijit
हटाएंNice coverage!
जवाब देंहटाएंthanks anupam
हटाएंvery nice post...
जवाब देंहटाएंits my walls
thaks amit
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