यह पुरानी दुनिया के परिवर्तन का वक्त है

पूरा सृष्टि चक्र चार युगों में बंटा हुआ है- सतयुग, त्रेता, द्वापर व कलियुग। समय चक्र अविरल गति से घूमता रहता है। इसे कोई भी प्रभावित नहीं कर सकता। चार युगों में प्रकृति प्रदत्त नियमानुसार दो युग तक स्वर्ग और दो युग तक नर्क होता है। आज दुनिया के हालात बताने के लिए काफी है कि यह पुरानी दुनिया के परिवर्तन का वक्त है। पूरे वैश्विक जगत के लिए यह खुशखबरी है कि वर्तमान समय नई दुनिया के आगमन का समय है। बस कुछ ही समय बाद नई दुनिया आ रही है। कैसी होगी नई दुनिया और कहां होंगे हम!... प्रस्तुत है एक नए युग की स्थापना का विश्लेषण।
हम एक ऐसी दुनिया में रहते हैं जहां सुख, दु:ख, मान-अपमान, स्वर्ग-नर्क, नया-पुराना दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। यह परमात्मा और प्रकृति के नियम में शाश्वत सत्य है। धर्म-अधर्म, पाप-पुण्य व सत्य-असत्य में हमेशा ही द्वंद्व रहा है। जहां सत्य, धर्म और पुण्य श्रेष्ठ दुनिया और श्रेष्ठ मनुष्य के मापदंड हैं, वहीं अधर्म, असत्य और पाप निकृष्ट मानव और आसुरी दुनिया के लक्षण हैं। दुनिया में जितने भी लोग हैं उनकी एक सर्वोपरि कल्पना मन में रहती है कि वे एक ऐसी दुनिया में रहें जहां उन्हें हर तरह से सुकून मिले। उस सुकून को प्राप्त करने के लिए लोग कई तरह के प्रयास करते हैं।
सार्वभौमिक रूप से हम देखें तो दुनिया में जितने भी संसाधन बनाए जा रहे हैं, उद्यम किए जा रहे हैं, उसका सिर्फ एक ही मकसद है कि एक ऐसा वातावरण, एक ऐसा सुख जो मन व तन को सच्ची शांति व सुख दे सके। परन्तु सत्य यह है कि कई बार हम सिर्फ भौतिक संसाधनों और प्रयासों तक ही सीमित हो जाते हैं। जिसकी वजह से जो चीजें भौतिकता से परे प्राप्त होने वाली हैं, वह न तो उपलब्ध हो पाती हैं और न ही हम वहां तक पहुंच पाते हैं। इसके उलट हम अपने आप को इस खोज में प्राप्ति से दूर तो होते ही हैं, साथ ही आंतरिक सशक्तिकरण के मामले में भी निचले स्तर तक चले जाते हैं। यही कारण है कि आज हम एक ऐसी दुनिया की तलाश में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं जहां शांति की तलाश पूरी हो सके। कई ऐसी चीजें हैं जिसका निर्माण सिर्फ ईश्वरीय सत्ता के पास ही है, न तो मनुष्य उसका निर्माण कर सकता है और न ही वह उसके द्वारा संभव है। हां, इतना जरूर है कि यदि वह ईश्वरीय योजना और उसके सिद्धान्तों को अपना मार्ग बना लेता है तो उस लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है।
अब प्रश्न उठता है कि आज मानव चारो ओर से दु:ख, अशांति, निराशा, अत्याचार से घिरा हुआ है, उसे इन सबसे मुक्ति कैसे और कब मिलेगी? आखिर कौन दिलाएगा इससे मुक्ति? यह सवाल आज सुरसा के समान मुंह बाए खड़ा है। यह दुनिया बदलाव के मुहाने पर खड़ी है लेकिन उससे पहले नई दुनिया की स्थापना भी शाश्वत सत्य है। इसी ईश्वरीय संविधान के तहत गुप्त रूप से नई दुनिया की स्थापना का महान और पुनीत कार्य चल रहा है। आने वाली नई दुनिया की स्थापना का यह ईश्वरीय संदेश सर्व मनुष्यात्माओं तक पहुंचाना प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के ईश्वरीय परमात्म योजना का हिस्सा है।
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विभिन्न देशों में सतयुग (स्वर्ग) के नाम
भारत- सतयुग, कृतयुग, स्वर्ग, वैकुण्ठ
अरबीयन- बहिश्त, जन्नत, अल्लाह का बगीचा
स्पेन- एल डोरडो
ईरान- गार्डन आॅफ युमा
ग्रीस व रोम- गोल्डन एज
स्केंडिनिव्या- लॉडस आॅफ गॉड
चीन- क्वेन लुन
ईजिप्त- तेपझीप
आॅस्ट्रेलिया- ड्रीम टाइम

ब्रह्माकुमारी पारुल, राजयोग प्रशिक्षिका प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय मोहद्दीपुर, गोरखपुर केन्द्र
(प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के मुख पत्र शिव आमंत्रण से साभार)

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टिप्पणियाँ

  1. Jis tarah se dharti par paap ka bojh badh raha hai...jitni jadi ye duniya khatam ho acchha hai..!!! Dhanywad Dwivedi Ji...!!!

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  2. Ye lekh padhkar achcha laga...teji se adhunikata aur bhogvilash ki taraf bhaag rahe logon ke bich aise lekh aur website margdarshak hai...aap dono ko galat raah pe chalene wale logo ko sahi marg dikhae ke liye bahut saabhaar...Neeraj Srivastava

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  3. logon ko nid se jagane ke liye yah lekh upyogi hai, dhanyavad

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  4. is tarah ke lekh hamesha padane ko mile to kitana achha ho

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  5. wow apaka lekh to kafi lokpriya hua, dhanyavad

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  6. उत्तर
    1. ap bhi achhe hai, jo achhi chijo par pratikriya dene se parahej nahi karate, dhanyavad

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  7. 'Jaisi drishti waisi srishti'
    Bhagwan ki is duniya me achha bhi hai aur bura bhi, raat hai din bhi, sukh hai dukh bhi.
    Krishan ji ke yug me bhi Kans tha aur Ram ke yug me Ravan.
    Gulab ke fool ke sath bhi bhagwan ne kante banaye hai.
    Jin logo ko is Duniya me sirf bura hi bura nazar aata hai hame unke savasth hone ki kamna karni chahiye aur unki NEGATIVE THINKING
    door rahna chahiye.
    Aisi duniya ki kamna karna jisme sirf achha hi achha hoga, sirf din hoga, sirf sukh hi hoga, sirf meetha hi meetha hoga, yeh sirf
    ek SAPNA hai aur jo VASNA se grast hai wo hi aisi duniya ki kamna karte hai

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  8. बेनामीमई 25, 2013

    जैसे अन्धे के लिए जगत अंधकारमय है
    और आँख वाले के लिए प्रकाशमय है
    वैसे ही अज्ञानी के लिए जगत दुखदायक है
    और ज्ञानी के लिए आनंदमय है

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