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प्रस्तुतकर्ता
Karupath
को
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यदि बहुत प्रयास करने के बाद भी उन्नति नहीं कर पा रहे हैं और गरीबी पीछा नहीं छोड़ती है या अत्यधिक धन कमाने के इच्छुक हैं तो इस यंत्र की साधना करें या सिद्ध साधक से प्राप्त करें।
विधि- इस यंत्र को कागज या भोजपत्र पर अष्टगन्ध या केसर की स्याही से या लाल पेन से प्रतिदिन 333 बार बनाया जाय और ‘ऊं ऐं ह्रीं क्लीं ऊं ऐं स्वाहा’ मंत्र का नित्यप्रति एक माला जप किया जाय। यह क्रिया 41 दिन तक करें। पुन: 41वें दिन वाला यंत्र ही काम में लाएं। इसके पूर्व के यंत्र बहते जल में प्रवाहित कर दें। इसके पश्चात दुर्गा सप्तशती का पाठ कर इस यंत्र को सिद्ध कर लें और पुन: धूप-दीप से पूजा करें। भगवती का प्रसाद समझकर इसे पुरुष दाहिनी भुजा और स्त्रियां बायीं भुजा अथवा गले में धारण करें या पूजा गृह में स्थापित कर यथा संभव अर्चना करती रहें।
आचार्य शरदचंद्र मिश्र
Keybord: Yantra, Kavach
नोट- इस वेबसाइट की अधिकांश फोटो गुगल सर्च से ली गई है, यदि किसी फोटो पर किसी को आपत्ति है तो सूचित करें, वह फोटो हटा दी जाएगीा
विधि- इस यंत्र को कागज या भोजपत्र पर अष्टगन्ध या केसर की स्याही से या लाल पेन से प्रतिदिन 333 बार बनाया जाय और ‘ऊं ऐं ह्रीं क्लीं ऊं ऐं स्वाहा’ मंत्र का नित्यप्रति एक माला जप किया जाय। यह क्रिया 41 दिन तक करें। पुन: 41वें दिन वाला यंत्र ही काम में लाएं। इसके पूर्व के यंत्र बहते जल में प्रवाहित कर दें। इसके पश्चात दुर्गा सप्तशती का पाठ कर इस यंत्र को सिद्ध कर लें और पुन: धूप-दीप से पूजा करें। भगवती का प्रसाद समझकर इसे पुरुष दाहिनी भुजा और स्त्रियां बायीं भुजा अथवा गले में धारण करें या पूजा गृह में स्थापित कर यथा संभव अर्चना करती रहें।
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