- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप
प्रस्तुतकर्ता
Karupath
को
- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप
जो साधक मां भगवती को अपना इष्ट मानते हैं या देवी के भक्त हैं, उन्हें इस यंत्र की साधना करनी चाहिए। सुयोग्य ब्राह्मण द्वारा निर्मित इस यंत्र को मंगाकर अपने पूजा गृह में रखना चाहिए। इस यंत्र से भगवती जगदम्बा प्रसन्न होती हैं।
लाभ- लक्ष्मी प्राप्ति, रोग निवारण व शत्रु नाश की मनोकामना पूर्ण होती है।
धारण विधि- यह यंत्र भोजपत्र पर बनाकर दस हजार मंत्रों के द्वारा निर्मित किया जाय। इसके बाद उसे पूजा गृह में या दाहिनी भुजा या गले में धारण कर एक माला या 27 बार ‘ऊं ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे’ का जप प्रतिदिन करें और भगवती का नित्यप्रति न हो सके तो केवल सोमवार को धूप-दीप इत्यादि से पूजन करें।
आचार्य शरदचंद्र मिश्र, 430 बी आजाद नगर, रूस्तमपुर, गोरखपुर
keyword: yantra, kavach
नोट- इस वेबसाइट की अधिकांश फोटो गुगल सर्च से ली गई है, यदि किसी फोटो पर किसी को आपत्ति है तो सूचित करें, वह फोटो हटा दी जाएगीा
लाभ- लक्ष्मी प्राप्ति, रोग निवारण व शत्रु नाश की मनोकामना पूर्ण होती है।
धारण विधि- यह यंत्र भोजपत्र पर बनाकर दस हजार मंत्रों के द्वारा निर्मित किया जाय। इसके बाद उसे पूजा गृह में या दाहिनी भुजा या गले में धारण कर एक माला या 27 बार ‘ऊं ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे’ का जप प्रतिदिन करें और भगवती का नित्यप्रति न हो सके तो केवल सोमवार को धूप-दीप इत्यादि से पूजन करें।
आचार्य शरदचंद्र मिश्र, 430 बी आजाद नगर, रूस्तमपुर, गोरखपुर
keyword: yantra, kavach
नोट- इस वेबसाइट की अधिकांश फोटो गुगल सर्च से ली गई है, यदि किसी फोटो पर किसी को आपत्ति है तो सूचित करें, वह फोटो हटा दी जाएगीा
टिप्पणियाँ

Nayi Jankari Ke liye Dhanyawad Dwivedi Ji...!!!!
जवाब देंहटाएंthanks jitendra
हटाएं