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प्रस्तुतकर्ता
Karupath
को
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अनेक यंत्र ऐसे होते हैं जो एक नहीं अनेक प्रकार की समस्याओं का समाधान करने में समर्थ होते हैं। कामनाभेद से इस प्रकार के यंत्रों की पूजा विधि और प्रयोग में लाने की विधि परिवर्तित हो जाती है।
विधि-
1-धन की वृद्धि, व्यापार में वृद्धि के लिए इस यंत्र को गुरु पुष्य अथवा रवि पुष्य मुहूर्त में अनार की कलम से बहीखाते के प्रथम पृष्ठ पर या श्वेत रंग के कागज पर लाल स्याही से बनाएं और प्रतिदिन स्नानादि के पश्चात इसका दर्शन करें और इसके समक्ष ‘ऊं श्रियै नम:’ मंत्र का 108 जप करें। शत्रु या मुकदमे में विजय के लिए इस यंत्र को अनार की कलम से पृथ्वी पर 1000 बार लिखें।
2- बच्चों के रोगों के निवारण के लिए इस यंत्र को नवरात्र में या गुरुपुष्य मुहूर्त में कर्पूर या हल्दी की सहायता से भोजपत्र पर बनाएं और इस भोजपत्र को चांदी की ताबीज में डालकर बच्चों को पहना दें।
3- यदि शिक्षा में मनचाही सफलता प्राप्त नहीं हो पाती है और प्रतियोगी परीक्षा में सम्मिलित हो रहे हों तो नवरात्र में इस यंत्र को 1000 की संख्या में भोजपत्र पर केसर की स्याही से बनाएं। अंतिम यंत्र को बनाकर इनकी पूजा-अर्चना करें और चांदी की ताबीज में डालकर इसे दाहिनी भुजा में धारण करें।
4- विवाह के कई वर्ष बाद भी संतान की प्राप्ति नहीं हो रही है तो नवरात्र में अथवा गुरुपुष्य योग में प्रारंभ कर
21 दिनों में इस यंत्र को 1000 बार बड़ के पत्तों पर लिखें, फिर इन पत्तों को किसी वर्तन या किसी संदूक में रखकर प्रतिदिन इस संदूक की पंचोपचार विधि से पूजा करें। प्रत्येक रविवार को इसके सम्मुख घी का दीपक जलाकर अपनी मनोकामना निवेदित करें। शीघ्र लाभ होगा।
आचार्य शरदचंद्र
keyword: kavach, yantra
नोट- इस वेबसाइट की अधिकांश फोटो गुगल सर्च से ली गई है, यदि किसी फोटो पर किसी को आपत्ति है तो सूचित करें, वह फोटो हटा दी जाएगीा
विधि-
1-धन की वृद्धि, व्यापार में वृद्धि के लिए इस यंत्र को गुरु पुष्य अथवा रवि पुष्य मुहूर्त में अनार की कलम से बहीखाते के प्रथम पृष्ठ पर या श्वेत रंग के कागज पर लाल स्याही से बनाएं और प्रतिदिन स्नानादि के पश्चात इसका दर्शन करें और इसके समक्ष ‘ऊं श्रियै नम:’ मंत्र का 108 जप करें। शत्रु या मुकदमे में विजय के लिए इस यंत्र को अनार की कलम से पृथ्वी पर 1000 बार लिखें।
2- बच्चों के रोगों के निवारण के लिए इस यंत्र को नवरात्र में या गुरुपुष्य मुहूर्त में कर्पूर या हल्दी की सहायता से भोजपत्र पर बनाएं और इस भोजपत्र को चांदी की ताबीज में डालकर बच्चों को पहना दें।
3- यदि शिक्षा में मनचाही सफलता प्राप्त नहीं हो पाती है और प्रतियोगी परीक्षा में सम्मिलित हो रहे हों तो नवरात्र में इस यंत्र को 1000 की संख्या में भोजपत्र पर केसर की स्याही से बनाएं। अंतिम यंत्र को बनाकर इनकी पूजा-अर्चना करें और चांदी की ताबीज में डालकर इसे दाहिनी भुजा में धारण करें।
4- विवाह के कई वर्ष बाद भी संतान की प्राप्ति नहीं हो रही है तो नवरात्र में अथवा गुरुपुष्य योग में प्रारंभ कर
21 दिनों में इस यंत्र को 1000 बार बड़ के पत्तों पर लिखें, फिर इन पत्तों को किसी वर्तन या किसी संदूक में रखकर प्रतिदिन इस संदूक की पंचोपचार विधि से पूजा करें। प्रत्येक रविवार को इसके सम्मुख घी का दीपक जलाकर अपनी मनोकामना निवेदित करें। शीघ्र लाभ होगा।
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