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प्रस्तुतकर्ता
Karupath
को
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कई बार ऐसा देखा जाता है कि विवाह के पश्चात कन्या को वर तो अच्छा लगता है लेकिन सास-ससुर उसके अनुकूल नहीं होते। वे बात-बात में बहू को मानसिक रूप से प्रताड़ित करते हैं। ऐसी स्थिति में कन्या बहुत परेशान रहती है। इसका प्रभाव उसके स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। ऐसी स्थिति में सास-ससुर को अनुकूल बनाने के लिए इस यंत्र का प्रयोग किया जाता है। ध्यान रहे इसका अनावश्यक रूप से प्रयोग करने पर अहित भी हो सकता है।
विधि- इस यंत्र को शुभ मुहूर्त में 9 दिन तक प्रतिदिन 27 बार बनाएं। जहां स्वयं लिखा है वहां अपना नाम लिखें। अंतिम दिन अंतिम बार बने इस यंत्र को धारण कर लें अथवा पूजा गृह में रख दें और नियमित इसकी पूजा करें।
आचार्य शरदचंद्र
keywohrd: kavac, yantra
नोट- इस वेबसाइट की अधिकांश फोटो गुगल सर्च से ली गई है, यदि किसी फोटो पर किसी को आपत्ति है तो सूचित करें, वह फोटो हटा दी जाएगीा
विधि- इस यंत्र को शुभ मुहूर्त में 9 दिन तक प्रतिदिन 27 बार बनाएं। जहां स्वयं लिखा है वहां अपना नाम लिखें। अंतिम दिन अंतिम बार बने इस यंत्र को धारण कर लें अथवा पूजा गृह में रख दें और नियमित इसकी पूजा करें।
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टिप्पणियाँ

This was interesting. Thanks for sharing :)
जवाब देंहटाएंthanks shivani
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