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प्रस्तुतकर्ता
Karupath
को
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अल्लाह ने सारी दुनिया के इंसानों को नेक बनाने के लिए समय-समय पर बहुत से कार्यक्रम किए हैं। उनमें से एक रमजान का महीना भी है, जो मुसलमानों के नबी के हिजरत कर देने के बाद से दूसरे साल से पूरे महीने का रोजा फर्ज हुआ। जो हर युवा लड़का-लड़की, औरत, मर्द सबपर फर्ज है। ये रोजा इस्लाम धर्म से पहले भी सारे धर्मों में समय-समय फर्ज रहा और उसी तरीके से मजहब इस्लाम में भी फर्ज हुआ।
यह बातें शहर-ए-काजी मौलाना वहीउल्लाह ने कही। उन्होंने कहा कि ये बात याद रखें कि दुनिया के अंदर पैदा होने वाले सारे इंसानों में दो हिस्सा है। एक उसका जिस्म है जो सबको दिखाई पड़ता है, जिससे हर एक की पहचान होती है। यह जिस्म मिट्टी से बना है और मिट्टी से ही बढ़ता, फलता-फूलता है। इसका खाना कुल मिट्टी से आता है। गेहूं, चावल, दाल, चना, सरसो तेल सब मिट्टी से निकलता है। मिठास भी गन्ने के जरिए मिट्टी से आती है। अलहासिल ये जिस्म कुल का कुल मिट्टी से बनता और बढ़ता है। इसके लिए सारी धरती के इंसान पूरी तरह मेहनत करते हैं। रात-दिन की दौड़-धूप सब इसी के आराम के लिए है। हालांकि सचाई ये है कि इस जिस्म की कोई हैसियत नहीं है।
जिस्म का वह हिस्सा जो नजर नहीं आता है, उसे रूह कहते हैं। जब तक वह साथ है, इस जिस्म की हैसियत है। जब तक वह साथ है। जब तक वह साथ है तबतक आंख है और उसकी रोशनी रहेगी। वह चली जाएगी तो आंख तो रहेगी लेकिन रोशनी नहीं रहेगी। इसी तरह से जब तक वह साथ हमारा दिल धड़क रहा है। जब वह साथ छोड़ देगी तो दिल तो रहेगा लेकिन धड़कना बंद हो जाएगा। जब तक वह है तभी तक दस्तखत का दाम है। जब वह चली जाएगी तब इस जिस्म की कोई हैसियत नहीं बचेगी। यहां तक कि अंधेरी रात में घर में लाश रखी हो तो उसकी बीबी भी उसके पास नहीं जाएगी। इसलिए कि उसके अंदर से उसकी रूह उसके जिस्म को छोड़कर चली गई। रूह का खाना-पीना और उसकी तरक्की अल्लाह के नाम, कुरान की तिलावत और अल्लाह के हुक्मों को बजा लाने में है।
उन्होंने कहा कि रमजान का पूरा महीना सारे इंसानों को इस बात की दावत देता है कि तुम अपनी रूह की हैसियत को समझो और खुदा के हुक्म को सब पर भारी समझो। मुसलमान इसी वजह से खुदा के हुक्म पर रात साढ़े तीन बजे से शाम 7 बजे तक खाना-पीना, बीबी से मिलना सब छोड़ देते हैं और इसी के साथ वे बुराइयां भी जिससे रूह गंदी होती है।
keyword: islam, ramajan
नोट- इस वेबसाइट की अधिकांश फोटो गुगल सर्च से ली गई है, यदि किसी फोटो पर किसी को आपत्ति है तो सूचित करें, वह फोटो हटा दी जाएगीा
यह बातें शहर-ए-काजी मौलाना वहीउल्लाह ने कही। उन्होंने कहा कि ये बात याद रखें कि दुनिया के अंदर पैदा होने वाले सारे इंसानों में दो हिस्सा है। एक उसका जिस्म है जो सबको दिखाई पड़ता है, जिससे हर एक की पहचान होती है। यह जिस्म मिट्टी से बना है और मिट्टी से ही बढ़ता, फलता-फूलता है। इसका खाना कुल मिट्टी से आता है। गेहूं, चावल, दाल, चना, सरसो तेल सब मिट्टी से निकलता है। मिठास भी गन्ने के जरिए मिट्टी से आती है। अलहासिल ये जिस्म कुल का कुल मिट्टी से बनता और बढ़ता है। इसके लिए सारी धरती के इंसान पूरी तरह मेहनत करते हैं। रात-दिन की दौड़-धूप सब इसी के आराम के लिए है। हालांकि सचाई ये है कि इस जिस्म की कोई हैसियत नहीं है।
जिस्म का वह हिस्सा जो नजर नहीं आता है, उसे रूह कहते हैं। जब तक वह साथ है, इस जिस्म की हैसियत है। जब तक वह साथ है। जब तक वह साथ है तबतक आंख है और उसकी रोशनी रहेगी। वह चली जाएगी तो आंख तो रहेगी लेकिन रोशनी नहीं रहेगी। इसी तरह से जब तक वह साथ हमारा दिल धड़क रहा है। जब वह साथ छोड़ देगी तो दिल तो रहेगा लेकिन धड़कना बंद हो जाएगा। जब तक वह है तभी तक दस्तखत का दाम है। जब वह चली जाएगी तब इस जिस्म की कोई हैसियत नहीं बचेगी। यहां तक कि अंधेरी रात में घर में लाश रखी हो तो उसकी बीबी भी उसके पास नहीं जाएगी। इसलिए कि उसके अंदर से उसकी रूह उसके जिस्म को छोड़कर चली गई। रूह का खाना-पीना और उसकी तरक्की अल्लाह के नाम, कुरान की तिलावत और अल्लाह के हुक्मों को बजा लाने में है।
उन्होंने कहा कि रमजान का पूरा महीना सारे इंसानों को इस बात की दावत देता है कि तुम अपनी रूह की हैसियत को समझो और खुदा के हुक्म को सब पर भारी समझो। मुसलमान इसी वजह से खुदा के हुक्म पर रात साढ़े तीन बजे से शाम 7 बजे तक खाना-पीना, बीबी से मिलना सब छोड़ देते हैं और इसी के साथ वे बुराइयां भी जिससे रूह गंदी होती है।
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