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प्रस्तुतकर्ता
Karupath
को
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रमजान का महीना खत्म होने के बाद आने वाले माह शव्वाल के प्रथम दिन ईद का त्योहार मनाया जाता है। ईद अल्लाह के ईनाम का त्योहार है। ईद के दिन मुसलमानों के गुनाहों की माफी का ईदगाह में एलान होता है। यह दिन खुदा की इबादत करने व उसका शुक्र बजा लाने का दिन है।
यह बातें शहरे काजी मुफ्ती मौलाना वलीउल्लाह ने कही। उन्होंने कहा कि हमारे रसूल ने फरमाया है कि इस ईदगाह में आने वाले सारे मुसलमानों को अल्लाह बक्श देते हैं। रमजान के रोजों में हमने खुदा के हुक्म पर खाना जो जिन्दगी है, पानी जो जिन्दगी है, उससे दूर हुए, बच्चा-बच्चा पूरे दिन खाना-पानी नहीं लेगा। खुदा के हुक्म से जैसे हम इन चीजों को छुए नहीं वैसे ही जिन चीजों को खुदा ने सदा हराम करार दिया है जैसे- किसी की पीठ पीछे बुराई करना, पड़ोसी को सताना, भाइयों-बहनों का हक मार लेना या मासूम बेगुनाह लोगों की हत्या करना आदि को रोजा के एक महीने की ट्रेनिंग में लोगों के दिलों में बैठा दिया जाता है। ताकि सारी उम्र ये बुराइयां न करें। इसकी खुशी में अल्लाह सबके गुनाहों को माफ फरमाते हैं। मुसलमानों के हर त्योहार में यह बात जरूरी होती है कि पाक व साफ होकर सबसे पहले खुदा के आगे सर झुकाएं। इसीलिए छोटा-बड़ा, बच्चा-बूढ़ा सभी मुसलमान ईदगाह जाते हैं। ताकि ईद की नमाज अदा कर लें। इस नमाज में यह भी वादा होता है कि हमने रोजे (रमजान भर) जिन बुराइयों को छोड़ने की ट्रेनिंग ली है उसको अपनी पूरी उम्र अदा करते रहें। इसीलिए बुजुर्गों ने फरमाया है कि ईद उसकी नहीं है जिसने नये कपड़े पहने हैं बल्कि ईद उसकी है जिसने खुदा से अपने माफी का परवाना पा लिया है।
keyword: id, ramajan, islam
नोट- इस वेबसाइट की अधिकांश फोटो गुगल सर्च से ली गई है, यदि किसी फोटो पर किसी को आपत्ति है तो सूचित करें, वह फोटो हटा दी जाएगीा
यह बातें शहरे काजी मुफ्ती मौलाना वलीउल्लाह ने कही। उन्होंने कहा कि हमारे रसूल ने फरमाया है कि इस ईदगाह में आने वाले सारे मुसलमानों को अल्लाह बक्श देते हैं। रमजान के रोजों में हमने खुदा के हुक्म पर खाना जो जिन्दगी है, पानी जो जिन्दगी है, उससे दूर हुए, बच्चा-बच्चा पूरे दिन खाना-पानी नहीं लेगा। खुदा के हुक्म से जैसे हम इन चीजों को छुए नहीं वैसे ही जिन चीजों को खुदा ने सदा हराम करार दिया है जैसे- किसी की पीठ पीछे बुराई करना, पड़ोसी को सताना, भाइयों-बहनों का हक मार लेना या मासूम बेगुनाह लोगों की हत्या करना आदि को रोजा के एक महीने की ट्रेनिंग में लोगों के दिलों में बैठा दिया जाता है। ताकि सारी उम्र ये बुराइयां न करें। इसकी खुशी में अल्लाह सबके गुनाहों को माफ फरमाते हैं। मुसलमानों के हर त्योहार में यह बात जरूरी होती है कि पाक व साफ होकर सबसे पहले खुदा के आगे सर झुकाएं। इसीलिए छोटा-बड़ा, बच्चा-बूढ़ा सभी मुसलमान ईदगाह जाते हैं। ताकि ईद की नमाज अदा कर लें। इस नमाज में यह भी वादा होता है कि हमने रोजे (रमजान भर) जिन बुराइयों को छोड़ने की ट्रेनिंग ली है उसको अपनी पूरी उम्र अदा करते रहें। इसीलिए बुजुर्गों ने फरमाया है कि ईद उसकी नहीं है जिसने नये कपड़े पहने हैं बल्कि ईद उसकी है जिसने खुदा से अपने माफी का परवाना पा लिया है।
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नोट- इस वेबसाइट की अधिकांश फोटो गुगल सर्च से ली गई है, यदि किसी फोटो पर किसी को आपत्ति है तो सूचित करें, वह फोटो हटा दी जाएगीा
टिप्पणियाँ

happy Eid gr8 post :-)
जवाब देंहटाएंEid mubarak!
जवाब देंहटाएंhttp://www.volatilespirits.com