शनि कृत अरिष्ट व उपाय

1, 4, 5 व छठें घर में बैठा शनि अशुभ फल देता है। 7, 8, 9 तथा 12वें घर में शुभ फल देता है। शनि जब अशुभ होता है तो व्यापार, जमीन-जायदाद में हानि देता है। शनि के प्रभाव से जोड़ों में दर्द तथा कन्याओं के विवाह में विलम्ब होता है।
उपाय: शनिवार का व्रत रखें। कड़ुवा तेल (सरसो तेल) का दीपक सुबह-शाम जलाएं। कांसे की कटोरी में तेल भरकर उसमें अपनी परछाई देखकर दान दें। शनिवार को सरसो के तेल में लोहे की कील डालकर दान करें और पीपल की जड़ में तेल चढ़ाएं। उड़द की दाल का सेवन न करें। पुराने लोहे की अंगूठी अथवा कड़ा बनाकर उसे धारण करें। तेल का पराठा बनाकर उसपर कोई मीठा रखकर गाय के बछड़ेको खिलाएं। यदि शनि की साढ़ेसाती अथवा ढैया चल रही हो तो अपने भोजन का कुछ भाग कौओं को खिलाना चाहिए। पानी वाला नारियल नदी में बहाएं। काले तिल के तेल अथवा सरसो के तेल का दान करें। मांस-मदिरा का सेवन न करें। वीरान जगह पर भूमि के नीचे सुरमा दबाएं। तवा, चिमटा व अंगीठी का दान करें। पीपल वृक्ष पर ध्वजा फहराएं। नंगे पैर मंदिर जाकर अपनी भूल के लिए क्षमा मांगे। शिवलिंग पर जल चढ़ाएं। नेत्रों की औषधि नि:शुल्क बांटें, इससे दृष्टिदोष दूर होता है। मकान के अंत में अंधेरी कोठरी बनाना धन-संपत्ति के लिए सहायक होगा। सरसो के तेल में भरा बर्तन पानी के भीतर जमीन के नीचे दबा दें। तेल में अपना मुख अवश्य देखें। नारियल या बादाम पानी में बहाएं। काला कुत्ता पालें अथवा उसकी सेवा करें और उसे रोटी खिलाएं। भवन की दहलीज साफ रखें एवं उसकी पूजा करें। परस्त्रीगमन एवं कामुकता से बचें। मिट्टी पर बैठकर स्नान न करें। चांदी का चौकोर टुकड़ा अपने पास रखें। दूध पानी में बहाएं। सरसो का तेल लगाकर उड़द बहाएं। शनिवार के दिन सूर्यास्त के समय जो भोजन करें उसमें काला तिल डालें। पीपल वृक्ष की पूजा करें।
आचार्य शरदचंद्र मिश्र, 430 बी आजाद नगर, रूस्तमपुर, गोरखपुर

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