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प्रस्तुतकर्ता
Karupath
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कुंडली का पंचम भाव संतान से संबंधित है। महर्षि पाराशर के अनुसार यदि लग्न से सप्तमेश पंचम में बैठा हो तो मनुष्य संतानरहित होगा। इसी तरह यदि पंचम भाव से छठें, आठवें तथा बारहवें पाप ग्रह स्थित हों तो उसी मनुष्य से परिवार समाप्त हो जाता है। यदि पंचम भाव में राहु हो तो संतान पैदा होकर नष्ट होने की आशंका रहती है। इसी तरह यदि पाप ग्रह 1, 7, 9 व 12 वें घर में हों और वे शत्रु क्षेत्री हों तो वंश विच्छेद योग बनता है।
- संतान गणपति स्त्रोत के तीन पाठ रोज श्रद्धापूर्वक 21 दिन तक करें।
- पाठ करने के लिए भाद्रपद या माघ मास की गणेश चतुर्थी को फलाहारी व्रत रखकर कुश या ऊन के आसन पर पूर्व या उत्तर मुख होकर बैठ जाएं।
-सामने भगवान गणेश की प्रतिमा या गणेश यंत्र को स्थापित करें।
-चंदन, धूप, दीप, नैवेद्य आदि से पूजन करें।
-इसके बाद गणेशजी का ध्यान करते हुए श्रद्धापूर्वक स्त्रोत का पाठ करें।
-स्त्रोत्र पाठ के उपरांत 'ऊं गं गणपतये नम:" मंत्र का 5 या 3 माला जप करें।
-सायंकाल चंद्रमा को अघ्र्य दें और लड्डुओं का प्रसाद गणेश जी को चढ़ाएं।
-यदि कोई 21 दिन तक पाठ नहीं कर सकता है तो एक वर्ष तक प्रतिमास की गणेश चतुर्थी तिथि को व्रत रहे व तीन संख्या का पाठ तथा 'ऊं गं गणपतये नम:" मंत्र का 11 माला जप करें।
गणपति स्त्रोत
नमोस्तु गणनाथाय सिद्धिबुद्धि युताय च। सर्वप्रदाय देवाय संततिवृद्धि प्रदाय च।। गुरुदराय गुरवे गोप्त्रे गुह्यासिताय ते। गोप्याय गोपिताशेष भुवनाय चिदात्मने।।
आचार्य शरदचंद्र मिश्र
Keywords: jyotish, falit joytish, santan prapti, putra prapti, santan prapti ke upay
नोट- इस वेबसाइट की अधिकांश फोटो गूगल खोज से ली गई हैं, यदि किसी फोटो पर किसी को कॉपीराइट विषय पर आपत्ति है तो सूचित करें, वह फोटो हटा दी जाएगी।
संतान प्राप्ति के उपाय अत्यंत सरल हैं
- संतान गणपति स्त्रोत के तीन पाठ रोज श्रद्धापूर्वक 21 दिन तक करें।
- पाठ करने के लिए भाद्रपद या माघ मास की गणेश चतुर्थी को फलाहारी व्रत रखकर कुश या ऊन के आसन पर पूर्व या उत्तर मुख होकर बैठ जाएं।
-सामने भगवान गणेश की प्रतिमा या गणेश यंत्र को स्थापित करें।
-चंदन, धूप, दीप, नैवेद्य आदि से पूजन करें।
-इसके बाद गणेशजी का ध्यान करते हुए श्रद्धापूर्वक स्त्रोत का पाठ करें।
-स्त्रोत्र पाठ के उपरांत 'ऊं गं गणपतये नम:" मंत्र का 5 या 3 माला जप करें।
-सायंकाल चंद्रमा को अघ्र्य दें और लड्डुओं का प्रसाद गणेश जी को चढ़ाएं।
-यदि कोई 21 दिन तक पाठ नहीं कर सकता है तो एक वर्ष तक प्रतिमास की गणेश चतुर्थी तिथि को व्रत रहे व तीन संख्या का पाठ तथा 'ऊं गं गणपतये नम:" मंत्र का 11 माला जप करें।
गणपति स्त्रोत
नमोस्तु गणनाथाय सिद्धिबुद्धि युताय च। सर्वप्रदाय देवाय संततिवृद्धि प्रदाय च।। गुरुदराय गुरवे गोप्त्रे गुह्यासिताय ते। गोप्याय गोपिताशेष भुवनाय चिदात्मने।।
आचार्य शरदचंद्र मिश्र
Keywords: jyotish, falit joytish, santan prapti, putra prapti, santan prapti ke upay
नोट- इस वेबसाइट की अधिकांश फोटो गूगल खोज से ली गई हैं, यदि किसी फोटो पर किसी को कॉपीराइट विषय पर आपत्ति है तो सूचित करें, वह फोटो हटा दी जाएगी।

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