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प्रस्तुतकर्ता
Karupath
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नियम योग का दूसरा अंग है। इसके निम्नलिखित अंग हैं-
शौच- शारीरिक व मानसिक शुद्धि।
संतोष- उचित प्रयास से उपलब्धि में संतोष।
तप- गर्मी, सर्दी आदि सहने का अभ्यास।
स्वाध्याय- नियम पूर्वक धर्मग्रंथों का अध्ययन करना।
ईश्वर प्रणिधान- परम सत्ता का ध्यान और उस पर अपने आप को छोड़ देना।
-आचार्य शरदचंद्र मिश्र
Keywords: yoga
नोट- इस वेबसाइट की अधिकांश फोटो गूगल खोज से ली गई हैं, यदि किसी फोटो पर किसी को कॉपीराइट विषय पर आपत्ति है तो सूचित करें, वह फोटो हटा दी जाएगी।
शौच- शारीरिक व मानसिक शुद्धि।
संतोष- उचित प्रयास से उपलब्धि में संतोष।
तप- गर्मी, सर्दी आदि सहने का अभ्यास।
स्वाध्याय- नियम पूर्वक धर्मग्रंथों का अध्ययन करना।
ईश्वर प्रणिधान- परम सत्ता का ध्यान और उस पर अपने आप को छोड़ देना।
-आचार्य शरदचंद्र मिश्र
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