- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप
प्रस्तुतकर्ता
Karupath
को
- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप
श्रावण मास के तृतीय सोमवार यानी 17 अगस्त 2015 को हरियाली तीज है। इसे कजली तीज के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन सूर्योदय 5 बजकर 34 मिनट और तृतीया तिथि का मान रात्रि 12 बजकर 37 मिनट तक है। परविद्धा तृतीया होने से यह मान्य तिथि है। पुराणों के अनुसार इस दिन माता पार्वती विरहाग्नि में तपकर भगवान शिव से मिली थीं। इसलिए भगवान शिव के साथ मां पार्वती की उपासना का यह दिन है।
पूर्वी उत्तर प्रदेश के गांवों में कजली तीज मनाने की प्राचीन परंपरा है। लोकगायन की प्रसिद्ध शैली भी इसी के नाम से प्रसिद्ध हो गई जिसे कजरी कहते हैं। महिलाएं एक साथ बैठकर इसे गाती हैं। इन गीतों में प्रधान रूप से शिव-पार्वती की लीला तथा दाम्पत्य विरह के भाव निहित रहते हैं।
-आचार्य शरदचंद्र मिश्र
Keywords: hindu, vrat
नोट- इस वेबसाइट की अधिकांश फोटो गूगल खोज से ली गई हैं, यदि किसी फोटो पर किसी को कॉपीराइट विषय पर आपत्ति है तो सूचित करें, वह फोटो हटा दी जाएगी।
पूर्वी उत्तर प्रदेश के गांवों में कजली तीज मनाने की प्राचीन परंपरा है। लोकगायन की प्रसिद्ध शैली भी इसी के नाम से प्रसिद्ध हो गई जिसे कजरी कहते हैं। महिलाएं एक साथ बैठकर इसे गाती हैं। इन गीतों में प्रधान रूप से शिव-पार्वती की लीला तथा दाम्पत्य विरह के भाव निहित रहते हैं।
-आचार्य शरदचंद्र मिश्र
Keywords: hindu, vrat
नोट- इस वेबसाइट की अधिकांश फोटो गूगल खोज से ली गई हैं, यदि किसी फोटो पर किसी को कॉपीराइट विषय पर आपत्ति है तो सूचित करें, वह फोटो हटा दी जाएगी।

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें
gajadhardwivedi@gmail.com